चुनाव संपन्न: अब चार तक, काटे नहीं कटते दिन और रात
बदलाव की आहट ने बढ़ाई सियासी हलचल
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बृज खंडेलवाल द्वारा
2 मई 2026
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चार मई को तय हो जाएगा ; दीदी लौटेंगी या दादा के हाथ आएगी पश्चिम बंगाल की कमान। लेकिन तब तक बड़े-बड़े नेताओं के दिलों की धड़कनें बगावत पर उतारू हैं, और दिल्ली से कोलकाता तक सियासी गलियारों में बेचैनी का आलम है।
चुनाव तो कई प्रांतों में हुए हैं ; पश्चिम बंगाल, केरल, असम, तमिलनाडु और पुदुचेरी , लेकिन सबकी निगाहें बंगाल पर टिकी हैं। 294 सीटों वाली इस विधानसभा में बहुमत का जादुई आंकड़ा 148 है, और इस बार की लड़ाई इसी आंकड़े के इर्द-गिर्द घूम रही है।
इस बार पश्चिम बंगाल में कुल 68,251,008 पंजीकृत मतदाताओं में से दोनों चरणों में औसत मतदान लगभग 91.57 प्रतिशत रहा। पब्लिक कॉमेंटेटर प्रोफेसर पारस नाथ चौधरी कहते हैं: "इतनी बड़ी भागीदारी यह इशारा करती है कि जनता इस बार कुछ नया सोचकर आई है , शायद बदलाव की ओर।"
राज्य की राजनीति में इस बार सीधा मुकाबला सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच रहा। टीएमसी ने अपनी सामाजिक योजनाओं, महिला मतदाताओं, अल्पसंख्यक समर्थन और 'बंगाली अस्मिता' को ढाल बनाया। भाजपा ने भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था, बेरोजगारी और 15 साल की सत्ता के विरुद्ध उठी थकान को अपना हथियार बनाया। वामपंथी दल और कांग्रेस इस बार हाशिये पर नज़र आए । 2021 में इनके संयुक्त मोर्चे को महज़ एक सीट मिली थी, हालाँकि उनका वोट-शेयर 117 सीटों पर जीत के अंतर से अधिक रहा था।
चुनाव प्रचार के दौरान एक बड़ा विवाद मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) को लेकर उठा, जिसमें अक्टूबर 2025 के बाद से लगभग 91 लाख मतदाताओं के नाम काटे गए — यानी कुल मतदाताओं का करीब 12 प्रतिशत। टीएमसी ने इसे राजनीतिक षड्यंत्र बताया, जबकि भाजपा ने इसे अवैध घुसपैठियों की सफाई करार दिया।
मतदान के बाद जारी एग्जिट पोल्स ने तस्वीर को और रोमांचक बना दिया है। रिपब्लिक टीवी के 'पोल ऑफ पोल्स' में भाजपा को 155 से 158 सीटें मिलती दिख रही हैं , बहुमत के आंकड़े से साफ ऊपर। अधिकांश एजेंसियाँ भाजपा को 146 से 175 सीटों के बीच रख रही हैं, जबकि टीएमसी 120 से 140 सीटों पर सिमटती नजर आ रही है। कुछ सर्वे टीएमसी को 177 से 195 सीटें भी देते हैं, जिससे साफ है कि सर्वे एकमत नहीं हैं।
उल्लेखनीय यह भी है कि एक्सिस माई इंडिया जैसी बड़ी एजेंसी ने इस बार बंगाल का एग्जिट पोल जारी नहीं किया, जिससे अटकलों का बाजार और गर्म है।
ममता बनर्जी ने सभी सर्वे खारिज करते हुए कहा कि उनकी पार्टी 226 से ज्यादा सीटें जीतेगी। दूसरी ओर भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी 180 से अधिक सीटों का दावा कर रहे हैं।
हालाँकि एग्जिट पोल्स हमेशा सही नहीं होते। 2021 में कई सर्वे गलत साबित हुए थे, जब भाजपा को बड़ी बढ़त दिखाने के बावजूद टीएमसी ने 215 सीटें जीती थीं। इस बार त्रिशंकु विधानसभा की संभावना पूरी तरह नकारी नहीं जा सकती।
उधर, असम में सत्तारूढ़ भाजपा गठबंधन के पक्ष में रुझान हैं। ज्यादातर सर्वे मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा की सरकार की वापसी के संकेत दे रहे हैं।
केरल में इस बार पारंपरिक ढर्रा टूटता दिख रहा है। मनोरमा न्यूज़-सीवोटर सर्वे में यूडीएफ को 82 से 94 सीटें और एलडीएफ को 44 से 56 सीटें मिलती दिख रही हैं। टुडेज़ चाणक्य का अनुमान है कि यूडीएफ 69, एलडीएफ 64 और भाजपा 7 सीटों के आसपास रहेगी। अगर ये रुझान सही निकले तो पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाला वाम मोर्चा लगातार दूसरी बार सत्ता में आने का रिकॉर्ड नहीं बना पाएगा।
तमिलनाडु में लोकल एक्टिविस्ट गोपाल कृष्णन के मुताबिक अधिकांश सर्वे डीएमके गठबंधन को बढ़त दे रहे हैं और मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की वापसी की संभावना मजबूत दिखाई दे रही है। पुदुचेरी में एनडीए के पक्ष में संकेत हैं।
4 मई का इंतज़ार
4 मई की सुबह 8 बजे से मतगणना शुरू होगी। अगर बंगाल में भाजपा सत्ता में आई, तो यह 2011 के बाद पहली बार होगा जब ममता बनर्जी की पार्टी सत्ता से बाहर जाएगी। और अगर टीएमसी वापसी करती है, तो यह उन तमाम सर्वेक्षणों के मुँह पर एक और तमाचा होगा जो बंगाल की जनता को समझने का दावा करते हैं।
सस्पेंस अपने चरम पर है। चार मई का इंतज़ार है।
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