लाल किले से मोदी का संदेश: आत्मनिर्भर भारत, युवा शक्ति और विकसित भारत
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बृज खंडेलवाल द्वारा
15 अगस्त 2026
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भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किला देशभक्ति के जज़्बे से सराबोर था। सेना के बैंड ने वंदे मातरम् की धुन छेड़ी और उसके बाद स्वदेशी 21 तोपों की सलामी दी गई। तिरंगे की छांव में Mi-17 हेलीकॉप्टरों ने पुष्पवर्षा की। ज्ञानपथ पर एनसीसी कैडेट और युवा स्वयंसेवक मौजूद थे। माहौल गंभीर भी था और उल्लासपूर्ण भी। हर तरफ राष्ट्रगौरव और विकसित भारत का संकल्प दिखाई दे रहा था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2026 को लाल किले से दिए अपने भाषण में मजबूत, आत्मनिर्भर और तकनीक के मामले में सक्षम भारत का खाका पेश किया। उनका मकसद साफ था: 2047 तक, यानी आजादी के 100 साल पूरे होने पर, भारत को विकसित राष्ट्र बनाना।
भाषण का सबसे अहम मुद्दा आत्मनिर्भर भारत रहा। मोदी ने मेक इन इंडिया, स्वदेशी और वोकल फॉर लोकल पर जोर दिया। उनका कहना था कि भारत को विदेशी निर्भरता कम करनी होगी। विनिर्माण, खेती, खाद्य प्रसंस्करण, तकनीक और नए आविष्कार देश की तरक्की के अहम आधार बन सकते हैं।
मोदी ने राष्ट्रीय ताकत की सात धाराओं की बात की, जिसे उन्होंने “शक्ति की सप्त धारा” कहा। इनमें विनिर्माण, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण, तकनीक और नवाचार, संपर्क और कनेक्टिविटी, रक्षा, हरित और नीली अर्थव्यवस्था तथा भारत की सॉफ्ट पावर शामिल हैं। उनका मानना है कि इन सात क्षेत्रों को मजबूत करके देश की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार दी जा सकती है।
तकनीक को भाषण में खास जगह मिली। प्रधानमंत्री ने अगले एक साल में एक करोड़ युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई का प्रशिक्षण देने की घोषणा की। सेमीकंडक्टर निर्माण पर भी जोर दिया गया। मकसद भारत को दुनिया की तकनीकी सप्लाई चेन का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनाना है।
छात्रों और नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए भी कुछ अहम घोषणाएं हुईं। मोदी ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग की बात कही, खासकर गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के युवाओं के लिए। उनका संदेश था कि देश के बदलाव की धुरी युवा होने चाहिए। खेलों और नई खेल प्रतिभाओं को खोजने पर भी उन्होंने जोर दिया।
महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी भी भाषण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रही। मोदी ने विधानसभाओं और संसद में महिलाओं की 33 प्रतिशत भागीदारी की जरूरत पर जोर दिया। यह कदम महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया में बराबर की जगह देने की दिशा में अहम माना जा सकता है।
ऊर्जा सुरक्षा को भी राष्ट्रीय विकास से जोड़ा गया। मोदी ने 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा पैदा करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा। उनके मुताबिक ऊर्जा में आत्मनिर्भरता आर्थिक विकास के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी जरूरी है।
राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी प्रधानमंत्री का रुख सख्त रहा। उन्होंने सशस्त्र नक्सलवाद के साथ-साथ “दिमागी नक्सलवाद” से भी सावधान किया। उनका तर्क था कि विकास के लिए देश की एकता, अमन और आंतरिक सुरक्षा बेहद जरूरी है।
इस पूरे भाषण में वंदे मातरम् का विशेष महत्व रहा। राष्ट्रीय गीत के 150 साल पूरे होने के मौके पर लाल किले में उसका गूंजना इतिहास, संस्कृति और राष्ट्रभावना को एक साथ जोड़ गया।
कुल मिलाकर मोदी का भाषण आर्थिक महत्वाकांक्षा और राष्ट्रवाद का मेल था। आत्मनिर्भरता, तकनीक, युवा, ऊर्जा, विनिर्माण और राष्ट्रीय एकता इसके प्रमुख स्तंभ रहे।
लेकिन असली इम्तिहान घोषणाओं के बाद शुरू होगा। बड़े लक्ष्य तभी मायने रखते हैं जब वे नौकरी, आमदनी, अवसर और बेहतर जिंदगी में बदलें। 2047 का विकसित भारत सिर्फ आंकड़ों और नारों से नहीं बनेगा। उसे करोड़ों आम भारतीयों की जिंदगी में महसूस होना चाहिए।
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