दक्षिण में आज़ादी का जश्न: विजय के संदेश से बदली तमिलनाडु की तस्वीर
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बृज खंडेलवाल द्वारा
चेन्नई, 16 अगस्त 2026
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भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर दक्षिण भारत देशभक्ति के रंग में रंगा नजर आया। तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक में तिरंगा फहराया गया, सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए और स्वतंत्रता सेनानियों को याद किया गया।
लेकिन इस बार तमिलनाडु का समारोह खास रहा। वजह थी मुख्यमंत्री और अभिनेता से नेता बने विजय का पहला स्वतंत्रता दिवस संबोधन।
चेन्नई के ऐतिहासिक फोर्ट सेंट जॉर्ज में विजय ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और परेड की सलामी ली। खुली गाड़ी में परेड का निरीक्षण करते हुए उनका अंदाज किसी फिल्मी दृश्य से कम नहीं लगा। लेकिन असली ध्यान उनके भाषण पर रहा।
विजय ने कहा कि आज की असली आज़ादी केवल विदेशी शासन से मुक्ति नहीं है। भ्रष्टाचार से मुक्ति भी उतनी ही जरूरी है। उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी सरकार के ‘मिशन मोड’ में काम करने की बात कही और साफ संदेश दिया कि सुशासन से कोई समझौता नहीं होगा।
उनका संदेश युवाओं पर भी केंद्रित था। विजय ने तमिलनाडु के युवाओं और दुनिया भर में बसे तमिल लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य के हितों की रक्षा उनकी प्राथमिकता है। जाति और धर्म की दीवारों से ऊपर उठकर समानता और सामाजिक न्याय को असली आज़ादी बताया।
समारोह में अभिनेत्री त्रिशा कृष्णन की मौजूदगी ने भी खूब सुर्खियां बटोरीं। वह विजय के माता-पिता के साथ अग्रिम पंक्ति में बैठी दिखाई दीं। विजय ने उन्हें और अपने माता-पिता को सलाम किया। यह भावुक दृश्य सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ।
तमिलनाडु से बाहर भी स्वतंत्रता दिवस पूरे उत्साह से मनाया गया। केरल में स्कूलों, सरकारी संस्थानों और विश्वविद्यालयों में ध्वजारोहण तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। राज्य के स्कूलों के लिए जारी निर्देशों में विद्यार्थियों और कर्मचारियों की अधिकतम भागीदारी पर जोर दिया गया।
कर्नाटक में बेंगलुरु सहित विभिन्न शहरों में तिरंगा फहराया गया। विधानसभा और सरकारी इमारतों पर रोशनी की गई तथा देशभक्ति से जुड़े सांस्कृतिक आयोजन हुए। बेंगलुरु का प्रसिद्ध फ्रीडम जैम भी स्वतंत्रता दिवस की संगीत परंपरा का हिस्सा रहा है।
फिर भी दक्षिण के इस पूरे जश्न में तमिलनाडु और विजय सबसे ज्यादा चर्चा में रहे। अभिनेता से मुख्यमंत्री बने विजय के लिए यह केवल रस्मी परेड और भाषण नहीं था। यह उनके राजनीतिक सफर की नई पारी का सार्वजनिक ऐलान भी था।
उनकी भाषा में तमिल अस्मिता, युवा उम्मीद और भ्रष्टाचार के खिलाफ तेवर साफ दिखाई दिए। सवाल अब यही है कि मंच पर दिया गया यह जोशीला पैगाम ज़मीन पर कितनी तेजी से अमल में आता है।
केरल और कर्नाटक में भी 80वें स्वतंत्रता दिवस को देशभक्ति के जोश के साथ मनाया गया। कर्नाटक में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने पहली बार मुख्यमंत्री के रूप में तिरंगा फहराया, बेंगलुरु में विधान सौध के सामने भव्य ‘फ्रीडम हब्बा’ का आयोजन हुआ जिसमें विविध सांस्कृतिक परंपराओं (यक्षगान, गरबा, ढोल-ताशा आदि) की परेड और कार्यक्रम शामिल थे, जबकि उत्तर कर्नाटक समेत विभिन्न जिलों में परेड, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और उपलब्धि हासिल करने वालों का सम्मान किया गया। केरल में मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने तिरुवनंतपुरम के सेंट्रल स्टेडियम में राष्ट्रीय ध्वज फहराया, जिला स्तर पर परेड और सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए, कोझिकोड में 10,000 आवाजों वाला गायन कार्यक्रम तथा महिलाओं की सुरक्षा को लेकर ‘रिसर्ज’ जैसी पहलें भी हुईं, हालांकि रिपोर्ट्स के मुताबिक, राज्य-स्तरीय समारोह में वंदे मातरम् नहीं गाया गया जिससे राजनीतिक चर्चा भी हुई।
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