सितंबर आते ही बज उठती थी Come September
पूरा इंडिया नचा था हॉलीवुड की इस फिल्मी टयून पर
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बृज खंडेलवाल द्वारा
1 September 2026
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जरा आंखें बंद कीजिए। धूल भरी सड़क है, आगे घोड़ी पर दूल्हा है, पीछे बारातियों की भीड़। अचानक बैंड वाला अपनी तुरही उठाता है और ऐसी धुन छेड़ देता है कि बूढ़े की मूंछ भी फड़कने लगे और जवान के पैर अपने-आप थिरकने लगें।
यही था वह दौर, जब ‘Come September’ की धुन ने भारत की शादियों, पिकनिकों और महफिलों में ऐसी दस्तक दी कि वह विदेशी होकर भी बिल्कुल अपनी लगने लगी।
साठ के दशक में हॉलीवुड फिल्म Come September भारत पहुंची और देखते ही देखते उसकी धुन दिलों पर छा गई।
इस धुन को बॉबी डैरिन ने रचा था। फिल्म में उनके साथ रॉक हडसन, जीना लोलोब्रिजिडा और सैंड्रा डी जैसे सितारे थे। डैरिन ने बारह-तार वाले गिटार पर इसकी शुरुआती धुन तैयार की थी। मकसद था: रोमांस भी हो, लय भी हो और उसमें थोड़ी शरारत भी। नतीजा ऐसा निकला कि गिटार, मैंडोलिन, एकॉर्डियन और बोंगो की आवाजें मिलकर ऐसी दिलकश रवानी पैदा कर गईं, कि बस हर कोई ट्विस्ट करने को आतुर।
भारत में इस धुन को किसी तर्जुमे की जरूरत नहीं पड़ी। इसमें बोल नहीं थे, लेकिन कहानी पूरी थी। उसमें जवानी थी, आजादी का अहसास था और जिंदगी को थोड़ा खुलकर जीने की गुंजाइश भी। मोहल्लों में बारात निकलती तो बैंड वाले फिल्मी गीतों के साथ पश्चिमी धुनों का भी तड़का लगा देते। ‘Come September’ बजते ही बारात का अनुशासन अक्सर छुट्टी पर चला जाता था। दूल्हे के रिश्तेदार, पड़ोसी और रास्ते के तमाशबीन, सबके पैर अपनी-अपनी पॉलिटिक्स करने लगते थे।
फिर बहुत सालों बाद आई: दूसरी कमाल की धुन, ब्राजील। आर्य बारोसो की मशहूर ब्राजीली रचना Aquarela do Brasil, जिसे दुनिया ने अलग-अलग वाद्य और ऑर्केस्ट्रा संस्करणों में जाना, भारत में भी एक खास पहचान बना चुकी थी। खासकर बैंड बाजों और ऑर्केस्ट्रा की दुनिया में इसकी लय ऐसी घुसी कि शहर ही नहीं, दूरदराज के कस्बों और गांवों की शादियों तक में इसकी गूंज सुनाई देती थी। कई बार बारातियों को यह भी मालूम नहीं होता था कि धुन ब्राज़ील की है। उनके लिए वह बस ‘बैंड वाले की जबरदस्त धुन’ थी।
यही तो संगीत का कमाल है। पासपोर्ट उसका अपना होता है, लेकिन दिलों पर कोई वीजा नहीं लगता।
‘Come September’ और ‘Brazil’ जैसी धुनों ने भारत में एक अजीब सांस्कृतिक घालमेल पैदा किया। ब्राज़ील की लय, हॉलीवुड की धुन और भारतीय बारात, तीनों एक ही सड़क पर मिल गए। शादी की रौनक में ऐसा घुल जाता था जैसे समोसे में चटनी।
‘Come September’ की सबसे बड़ी ताकत उसकी सादगी थी। धुन ऊपर जाती, नीचे आती और कानों में अटक जाती। उस समय के ‘ट्विस्ट’ और आज के ‘फ्री स्टाइल’ के बीच शायद कोई औपचारिक समझौता नहीं था, लेकिन पैर अपना फैसला खुद कर लेते थे। विदेशी धुन भारतीय शादी के लिए तैयार थी, बस उसमें ढोल, नगाड़ा और थोड़ी देसी बेफिक्री जोड़नी थी।
बॉलीवुड भी भला पीछे कैसे रहता?
भारतीय संगीतकारों ने ‘Come September’ की लय और सुरों से प्रेरणा ली। इसकी छाप कई गीतों और बैकग्राउंड स्कोर में दिखाई दी। Hamraaz जैसी फिल्मों में इसकी गूंज महसूस हुई। बाद के दशकों में भी इसकी धुन नए रूपों में लौटती रही। राजा का ‘नजरें मिलीं, दिल धड़का’ और दूसरे लोकप्रिय गीतों में भी इस तरह की पश्चिमी लय का असर सुनाई दिया। भारतीय संगीतकार विदेशी धुनों को सुनते, उनमें से कोई टुकड़ा पकड़ते और उसे अपनी मिट्टी में रोप देते। फिर उससे एक नया पौधा निकलता, जिसमें विदेशी खुशबू भी होती और देसी रंग भी।
साठ और सत्तर के दशक की शादियों को याद कीजिए। न डीजे था, न लेजर लाइट, न कान फोड़ने वाले स्पीकर। एक बैंड था, कुछ चमकती तुरहियां थीं, ढोल था और उत्साहित बाराती थे। फिर भी मजा कम नहीं था। बल्कि शायद ज्यादा था।
आज बारात में डीजे होता है और गाने की आवाज इतनी तेज होती है कि दूल्हे को भी पता नहीं चलता कि उसकी शादी हो रही है या चुनाव प्रचार। उस जमाने में एक अच्छी धुन ही काफी थी।
‘Come September’ इसलिए याद रह गई क्योंकि उसने संगीत को केवल सुनने की चीज नहीं रहने दिया। उसने लोगों को चलाया, झुमाया और कुछ देर के लिए सामाजिक लिहाज की जंजीरें ढीली कर दीं।
‘Brazil’ ने भी यही काम अपनी अलग लय में किया। उसकी मस्ती भरी चाल ने भारतीय बारातों को बताया कि दुनिया बहुत बड़ी है, लेकिन नाचने के लिए जगह हर जगह मिल सकती है।
साठ साल से ज्यादा गुजर गए। लेकिन कभी-कभी किसी पुराने विवाह समारोह में वह धुन सुनाई पड़ जाती है तो बीता हुआ जमाना अचानक लौट आता है।
धूल उड़ती सड़क, रंगीन कपड़े, घोड़ी पर बैठा दूल्हा, हाथ में फूलों की माला और आगे-आगे उछलता बाराती।
तुरही बजती है: ‘Come September…’
और कहीं दूर से ‘Brazil’ की लय मिल जाती है।
तब समझ आता है कि संगीत की कोई सरहद नहीं होती। हॉलीवुड की धुन हो या ब्राज़ील की लय; भारत की बारात उसे अपना बना लेती है।
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